3

Thursday, 20 October 2016

अहोई अष्टमी कथा-२

अहोई अष्टमी कथा-२



प्राचीन समय की बात है| दतिया नामक नगर में चन्द्रभान नाम का एक साहूकार रहता था | उसकी पत्नी का नाम चन्द्रिका था | चन्द्रिका बहुत गुणवानशील, सौंदर्यपूर्ण, चरित्रवान और पतिव्रता स्त्री थी | उनके कई संताने हुईं, लेकिन वे अल्पकाल में ही चल बसीं | संतानों के इस प्रकार मर जाने से दोनों बहुत दुखी रहते थें | पति - पत्नी सोचा करते थे की मरने के बाद हमारी धन संपत्ति का वारिस कौन होगा | एक दिन धन आदि का मोह - त्याग दोनों ने जंगल में वास करने का निश्चय किया | अगले दिन घर - बार भगवान के भरोसे छोड़ के वन को चल पड़े | चलते - चलते कई दिनों बाद दोनों बदरिकाश्रम के समीप एक शीतल कुंड पर पहुंचे | कुंड के निकट अन्न - जल त्याग कर दोनों ने मरने का निश्चय किया | इस प्रकार बैठे - बैठे उन्हें सात दिन हो गएँ | सातवें दिन आकाशवाणी हुई- '' तुम लोग अपने प्राण मत त्यागो | यह दुःख तुम्हे पूर्व जन्म के पापो के कारण हुआ है | यदि चन्द्रिका अहोई अष्टमी का व्रत रखे तो अहोई देवी प्रसन्न होंगी और वरदान देने आएँगी | तब तुम उनसे अपने पुत्रो की दीर्घायु मांगना | इसके बाद दोनों घर वापस आ गए | अष्टमी के दिन चन्द्रिका ने विधि- विधान से श्रद्धापूर्वक व्रत किया | रात्रि को पति पत्नी ने स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण की उसी समय उन्हें अहोई देवी ने दर्शन दियें और वर माँगने को कहा | तब चन्द्रिका ने वर मांगा की मेरे बच्चे कम आयु में ही देव लोक चले जाते है | उन्हें दीर्घायु होने का वरदान दे दें | अहोई देवी ने तथास्तु कहा और अंतरध्यान हो गई | कुछ दिनों के बाद चन्द्रिका को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई | जो बहुत विद्वान, प्रतापी और दीर्घायु हुआ |

जिस स्त्री के बेटा अथवा बेटी का विवाह हुआ हो, उसे अहोई माता का उजमन करना चाहिए | एक थाल में चार - चार पूड़ियां सात जगह रखें| फिर उन पर थोड़ा - थोड़ा हलवा रख दें | थाल में एक साड़ी, ब्लाउज  और सामर्थ्य के अनुसार रूपए रख कर, थाल के चारो ओर हाथ फेरकर सासू जी के चरण स्पर्श करें तथा उसे सादर उन्हें दें | सासूजी तीयल व रूपए स्वयं रख लें एवं हलवा पूरी प्रसाद के रूप में बाँट दें | हलवा पूरी का बायना बहन बेटी के यहाँ भी भेजना चाहिए |

अहोई अष्टमी कथा-१

अहोई अष्टमी कथा-१


प्राचीन काल में एक साहुकार था, जिसके सात बेटे और सात बहुऐं थी | इस साहुकार की एक बेटी भी थी जो दीपावली में ससुराल से मायके आई थी | दीपावली पर घर को लीपने के लिए सातों बहुएं मिट्टी लाने जंगल में गई तो ननद भी उनके साथ चली गयी| साहुकार की बेटी जहां मिट्टी खोद रही थी उस स्थान पर स्याऊ अपने साथ बेटों से साथ रहती थी. मिट्टी खोदते हुए ग़लती से साहूकार की बेटी की खुरपी के चोट से स्याऊ  का एक बच्चा मर गया. स्याऊ  इस पर क्रोधित होकर बोली मैं तुम्हारी कोख बांधूंगी.

स्याऊ  के वचन सुनकर साहूकार की बेटी अपनी सातों भाभीयों  से एक एक कर विनती करने लगी कि वह उसके बदले अपनी कोख बंधवा लें. सबसे छोटी भाभी ननद के बदले अपनी कोख बंधवाने के लिए तैयार हो जाती है।  इसके बाद छोटी भाभी के जो भी बच्चे होते, वे सात दिन बाद मर जाते थे। सात पुत्रों की इस प्रकार  मृत्यु होने के बाद उसने पंडित को बुलवाकर इसका कारण पूछा। पंडित ने सुरही गाय की सेवा करने की सलाह दी।

सुरही सेवा से प्रसन्न होती है और उसे स्याऊ  के पास ले जाती है।  रास्ते में थक जाने पर दोनों आराम करने लगते हैं अचानक साहुकार की छोटी बहू की नज़र एक ओर जाती हैं, वह देखती है कि एक सांप गरूड़ पंखनी के बच्चे को डंसने जा रहा है और वह सांप को मार देती है. इतने में गरूड़ पंखनी  वहां आ जाती है और खून बिखरा हुआ देखकर उसे लगता है कि छोटी बहु ने उसके बच्चे के मार दिया है इस पर वह छोटी बहू को चोंच मारना शुरू कर देती है।  छोटी बहू इस पर कहती है कि उसने तो उसके बच्चे की जान बचाई है. गरूड़ पंखनी इस पर खुश होती है और सुरही सहित उन्हें स्याऊ के पास पहुंचा देती है।

स्याहु छोटी बहू की सेवा से प्रसन्न होकर उसे सात पुत्र और सात बहु होने का अशीर्वाद देती है।  स्याऊ के आशीर्वाद से छोटी बहु का घर पुत्र और पुत्र वधुओं से हरा भरा हो जाता है। अहोई का अर्थ एक प्रकार से यह भी होता है “अनहोनी को होनी बनाना” जैसे साहुकार की छोटी बहू ने कर दिखाया था.

अहोई अष्टमी व्रत विधि 
अहोई अष्टमी कथा (२)
गणेश जी की कथा 
Recipes for AAHOI

अहोई अष्टमी व्रत विधि

अहोई अष्टमी व्रत विधि एवं कथा 


करवा चौथ के चार दिन बाद अष्टमी तिथि को देवी अहोई माता का व्रत किया जाता है। यह व्रत पुत्र की लम्बी आयु और सुखमय जीवन की कामना से पुत्रवती महिलाएं करती हैं।  कृर्तिक मास की अष्टमी तिथि को कृष्ण पक्ष में यह व्रत रखा जाता है इसलिए इसे अहोई अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है । सभी माताएँ पहले से चाँदी का एक अहोई या स्याऊ और चाँदी के दो मोती बनवाकर डोरी मे डलवा लें। 

अहोई अष्टमी व्रत विधि 

व्रत के दिन प्रात: उठकर स्नान करें और पूजा पाठ करके संकल्प करें कि पुत्र की लम्बी आयु एवं सुखमय जीवन हेतु मैं अहोई माता का व्रत कर रही हूं।  अहोई माता मेरे पुत्रों को दीर्घायु, स्वस्थ एवं सुखी रखें।  अनहोनी को होनी बनाने वाली माता देवी पार्वती हैं इसलिए माता पर्वती की पूजा करें।  अहोई माता की पूजा के लिए गेरू से दीवाल पर अहोई माता का चित्र बनायें और साथ ही स्याऊ और उसके सात पुत्रों का चित्र बनायें। चाहें तो बना बनाया चार्ट बाजार से खरीद सकती हैं|

सूर्यास्त के बाद तारे निकलने पर अहोई माता की पूजा प्रारंभ करने से पूर्व ज़मीन को साफ करें| फिर चौक पूरकर, एक लोटे मे जल भरकर एक पटरे पर कलश की तरह रखकर पूजा करें| फिर रोली, चावल व दूध-भात से अहोई का पूजन करें| जल से भरें लोटे पर स्वास्तिक बना लें| एक कटोरी में हलवा तथा सामर्थ्य के अनुसार रूपए का बायना निकालकर रख लें और हाथ में सात दाने गेहूँ लेकर कथा सुनें| कथा सुनने के बाद अहोई की माला गले मे पहन लें और जो बायना निकाला था, उसे सासूजी का चरण स्पर्श कर उन्हें दे दें|

इसके बाद तारों को अर्ध्य देकर भोजन करें| अगले दिन अहोई को गले से उतारकर उसका गुड से भोग लगाएँ और जल के छीटें देकर आदर सहित स्वच्छ स्थान पर रख दें| जितने बेटे अविवाहित हों, उतनी बार १-१ तथा जितने बेटों का विवाह हो गया हो, उतनी बार २-२ चाँदी के दाने अहोई मे डालती जाएँ| ऐसा करने से अहोई देवी प्रसन्न होकर बेटों की दीर्घायु करके घर मे मंगल करती हैं| इस दिन ब्राह्माणो को पेठा दान करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है|

अहोई अष्टमी कथा (१)
अहोई अष्टमी कथा (२)
गणेश जी की कथा 
Recipes for AAHOI

Tuesday, 18 October 2016

Ganesh ji ki katha (गणेश जी की कथा)

गणेश जी की कथा 


एक बुढ़िया थी। वह बहुत ही ग़रीब और अंधी थीं। उसके एक बेटा और बहू थे। वह बुढ़िया सदैव गणेश जी की पूजा किया करती थी। एक दिन गणेश जी प्रकट होकर उस बुढ़िया से बोले-
 'बुढ़िया मां! तू जो चाहे सो मांग ले।'
बुढ़िया बोली- 'मुझसे तो मांगना नहीं आता। कैसे और क्या मांगू?'
तब गणेशजी बोले - 'अपने बहू-बेटे से पूछकर मांग ले।'
तब बुढ़िया ने अपने बेटे से कहा- 'गणेशजी कहते हैं 'तू कुछ मांग ले' बता मैं क्या मांगू?'
पुत्र ने कहा- 'मां! तू धन मांग ले।'
बहू से पूछा तो बहू ने कहा- 'नाती मांग ले।'
तब बुढ़िया ने सोचा कि ये तो अपने-अपने मतलब की बात कह रहे हैं। अत: उस बुढ़िया ने पड़ोसिनों से पूछा, तो उन्होंने कहा- 'बुढ़िया! तू तो थोड़े दिन जीएगी, क्यों तू धन मांगे और क्यों नाती मांगे। तू तो अपनी आंखों की रोशनी मांग ले, जिससे तेरी ज़िन्दगी आराम से कट जाए।'
इस पर बुढ़िया बोली- 'यदि आप प्रसन्न हैं, तो मुझे नौ करोड़ की माया दें, निरोगी काया दें, अमर सुहाग दें, आंखों की रोशनी दें, नाती दें, पोता, दें और सब परिवार को सुख दें और अंत में मोक्ष दें।'
यह सुनकर तब गणेशजी बोले- 'बुढ़िया मां! तुने तो हमें ठग दिया। फिर भी जो तूने मांगा है वचन के अनुसार सब तुझे मिलेगा।' और यह कहकर गणेशजी अंतर्धान हो गए। उधर बुढ़िया मां ने जो कुछ मांगा वह सबकुछ मिल गया। हे गणेशजी महाराज! जैसे तुमने उस बुढ़िया मां को सबकुछ दिया, वैसे ही सबको देना।

करवाचौथ व्रत करने की टिप्स 
करवाचौथ  की कथा 
Recipes for KARWACHAUTH

अहोई अष्टमी व्रत विधि 
अहोई अष्टमी कथा (१)
अहोई अष्टमी कथा (२)
Recipes for AAHOI

Monday, 17 October 2016

Karwachauth Story in Hindi


                                                                करवा चौथ व्रत कथा
करवा चौथ के दिन व्रत कथा पढ़ना अनिवार्य माना गया है। करवा चौथ की कई कथाएं है लेकिन सबका मूल एक ही है। करवा चौथ की एक प्रचलित कथा निम्न है:
करवा चौथ व्रत कथा 
महिलाओं के अखंड सौभाग्य का प्रतीक करवा चौथ व्रत की कथा कुछ इस प्रकार है- एक साहूकार के सात लड़के और एक लड़की थी। एक बार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सेठानी सहित उसकी सातों बहुएं और उसकी बेटी ने भी करवा चौथ का व्रत रखा। रात्रि के समय जब साहूकार के सभी लड़के भोजन करने बैठे तो उन्होंने अपनी बहन से भी भोजन कर लेने को कहा। इस पर बहन ने कहा- भाई, अभी चांद नहीं निकला है। चांद के निकलने पर उसे अर्घ्य देकर ही मैं आज भोजन करूंगी।
साहूकार के बेटे अपनी बहन से बहुत प्रेम करते थे, उन्हें अपनी बहन का भूख से व्याकुल चेहरा देख बेहद दुख हुआ। साहूकार के बेटे नगर के बाहर चले गए और वहां एक पेड़ पर चढ़ कर अग्नि जला दी। घर वापस आकर उन्होंने अपनी बहन से कहा- देखो बहन, चांद निकल आया है। अब तुम उन्हें अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करो। साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों से कहा- देखो, चांद निकल आया है, तुम लोग भी अर्घ्य देकर भोजन कर लो। ननद की बात सुनकर भाभियों ने कहा- बहन अभी चांद नहीं निकला है, तुम्हारे भाई धोखे से अग्नि जलाकर उसके प्रकाश को चांद के रूप में तुम्हें दिखा रहे हैं।
साहूकार की बेटी अपनी भाभियों की बात को अनसुनी करते हुए भाइयों द्वारा दिखाए गए चांद को अर्घ्य देकर भोजन कर लिया। इस प्रकार करवा चौथ का व्रत भंग करने के कारण विघ्नहर्ता भगवन श्री गणेश साहूकार की लड़की पर अप्रसन्न हो गए। गणेश जी की अप्रसन्नता के कारण उस लड़की का पति बीमार पड़ गया और घर में बचा हुआ सारा धन उसकी बीमारी में लग गया। 
साहूकार की बेटी को जब अपने किए हुए दोषों का पता लगा तो उसे बहुत पश्चाताप हुआ। उसने गणेश जी से क्षमा प्रार्थना की और फिर से विधि-विधान पूर्वक चतुर्थी का व्रत शुरू कर दिया। उसने उपस्थित सभी लोगों का श्रद्धानुसार आदर किया और तदुपरांत उनसे आशीर्वाद ग्रहण किया।

इस प्रकार उस लड़की के श्रद्धा-भक्ति को देखकर एकदंत भगवान गणेश जी उसपर प्रसन्न हो गए और उसके पति को जीवनदान प्रदान किया। उसे सभी प्रकार के रोगों से मुक्त करके धन, संपत्ति और वैभव से युक्त कर दिया।
कहते हैं इस प्रकार यदि कोई मनुष्य छल-कपट, अहंकार, लोभ, लालच को त्याग कर श्रद्धा और भक्तिभाव पूर्वक चतुर्थी का व्रत को पूर्ण करता है, तो वह जीवन में सभी प्रकार के दुखों और क्लेशों से मुक्त होता है और सुखमय जीवन व्यतीत करता है।

गणेश जी की कथा 
करवाचौथ व्रत करने की टिप्स 
Recipes for KARWACHAUTH


Tips for Healthy Karwachauth

Karwachauth is one of the most popular Hindu Festival, in which married women fast from dawn to dusk for their husband's long life.
While on fast, lot of toxins are released from our body.  Many feels like acidity, nausea, headache, lethargy, etc. To avoid this situation, it is important to know what you can/cannot eat in Sarghi, to be active throughout the day during fasting for your beloved partner.
Here are some healthy tips to remember for Karwachauth, so that you remain energetic throughout the day::
         Traditionally Karwachauth fast is observed by eating Sarghi early in the morning before sunrise and breaking the fast at night after moonrise.
For Sarghi----
  • Have tea with lots of milk and low fat meal to avoid acidity.
  • Sweet should be taken in very very small quantity, otherwise we will feel very hungry during daytime.
  • Protein rich diet, e.g. milk products.
  • Dry fruits (rich in good fats) to keep full during the day, preferably 20-22 soaked almonds.
  • Fiber rich fruits.
  • Take pomegranate and you will not feel thirsty whole day.
After Moonrise----
  • Break the fast by drinking water or fruit juice.
  •  Dinner should be light with foods high in proteins and carbohydrates.
  • Have fresh lime water after food to aid digestion.
  • Say no to oily and spicy food.                   .

         I wish everyone Happy Karwachauth, may this adds harmony, understanding and love in the married life of each and every couple.  
NOTE:- Basically Karwa is another name for earthen Pot and Chauth means fourth day of Krishna Paksh in the month of Kartik.

करवाचौथ  की कथा 
गणेश जी की कथा 
Recipes for KARWACHAUTH