अहोई अष्टमी कथा-१
प्राचीन काल में एक साहुकार था, जिसके सात बेटे और सात बहुऐं थी | इस साहुकार की एक बेटी भी थी जो दीपावली में ससुराल से मायके आई थी | दीपावली पर घर को लीपने के लिए सातों बहुएं मिट्टी लाने जंगल में गई तो ननद भी उनके साथ चली गयी| साहुकार की बेटी जहां मिट्टी खोद रही थी उस स्थान पर स्याऊ अपने साथ बेटों से साथ रहती थी. मिट्टी खोदते हुए ग़लती से साहूकार की बेटी की खुरपी के चोट से स्याऊ का एक बच्चा मर गया. स्याऊ इस पर क्रोधित होकर बोली मैं तुम्हारी कोख बांधूंगी.
स्याऊ के वचन सुनकर साहूकार की बेटी अपनी सातों भाभीयों से एक एक कर विनती करने लगी कि वह उसके बदले अपनी कोख बंधवा लें. सबसे छोटी भाभी ननद के बदले अपनी कोख बंधवाने के लिए तैयार हो जाती है। इसके बाद छोटी भाभी के जो भी बच्चे होते, वे सात दिन बाद मर जाते थे। सात पुत्रों की इस प्रकार मृत्यु होने के बाद उसने पंडित को बुलवाकर इसका कारण पूछा। पंडित ने सुरही गाय की सेवा करने की सलाह दी।
सुरही सेवा से प्रसन्न होती है और उसे स्याऊ के पास ले जाती है। रास्ते में थक जाने पर दोनों आराम करने लगते हैं अचानक साहुकार की छोटी बहू की नज़र एक ओर जाती हैं, वह देखती है कि एक सांप गरूड़ पंखनी के बच्चे को डंसने जा रहा है और वह सांप को मार देती है. इतने में गरूड़ पंखनी वहां आ जाती है और खून बिखरा हुआ देखकर उसे लगता है कि छोटी बहु ने उसके बच्चे के मार दिया है इस पर वह छोटी बहू को चोंच मारना शुरू कर देती है। छोटी बहू इस पर कहती है कि उसने तो उसके बच्चे की जान बचाई है. गरूड़ पंखनी इस पर खुश होती है और सुरही सहित उन्हें स्याऊ के पास पहुंचा देती है।
स्याहु छोटी बहू की सेवा से प्रसन्न होकर उसे सात पुत्र और सात बहु होने का अशीर्वाद देती है। स्याऊ के आशीर्वाद से छोटी बहु का घर पुत्र और पुत्र वधुओं से हरा भरा हो जाता है। अहोई का अर्थ एक प्रकार से यह भी होता है “अनहोनी को होनी बनाना” जैसे साहुकार की छोटी बहू ने कर दिखाया था.
अहोई अष्टमी व्रत विधि
अहोई अष्टमी कथा (२)
गणेश जी की कथा
Recipes for AAHOI
प्राचीन काल में एक साहुकार था, जिसके सात बेटे और सात बहुऐं थी | इस साहुकार की एक बेटी भी थी जो दीपावली में ससुराल से मायके आई थी | दीपावली पर घर को लीपने के लिए सातों बहुएं मिट्टी लाने जंगल में गई तो ननद भी उनके साथ चली गयी| साहुकार की बेटी जहां मिट्टी खोद रही थी उस स्थान पर स्याऊ अपने साथ बेटों से साथ रहती थी. मिट्टी खोदते हुए ग़लती से साहूकार की बेटी की खुरपी के चोट से स्याऊ का एक बच्चा मर गया. स्याऊ इस पर क्रोधित होकर बोली मैं तुम्हारी कोख बांधूंगी.
स्याऊ के वचन सुनकर साहूकार की बेटी अपनी सातों भाभीयों से एक एक कर विनती करने लगी कि वह उसके बदले अपनी कोख बंधवा लें. सबसे छोटी भाभी ननद के बदले अपनी कोख बंधवाने के लिए तैयार हो जाती है। इसके बाद छोटी भाभी के जो भी बच्चे होते, वे सात दिन बाद मर जाते थे। सात पुत्रों की इस प्रकार मृत्यु होने के बाद उसने पंडित को बुलवाकर इसका कारण पूछा। पंडित ने सुरही गाय की सेवा करने की सलाह दी।
सुरही सेवा से प्रसन्न होती है और उसे स्याऊ के पास ले जाती है। रास्ते में थक जाने पर दोनों आराम करने लगते हैं अचानक साहुकार की छोटी बहू की नज़र एक ओर जाती हैं, वह देखती है कि एक सांप गरूड़ पंखनी के बच्चे को डंसने जा रहा है और वह सांप को मार देती है. इतने में गरूड़ पंखनी वहां आ जाती है और खून बिखरा हुआ देखकर उसे लगता है कि छोटी बहु ने उसके बच्चे के मार दिया है इस पर वह छोटी बहू को चोंच मारना शुरू कर देती है। छोटी बहू इस पर कहती है कि उसने तो उसके बच्चे की जान बचाई है. गरूड़ पंखनी इस पर खुश होती है और सुरही सहित उन्हें स्याऊ के पास पहुंचा देती है।
स्याहु छोटी बहू की सेवा से प्रसन्न होकर उसे सात पुत्र और सात बहु होने का अशीर्वाद देती है। स्याऊ के आशीर्वाद से छोटी बहु का घर पुत्र और पुत्र वधुओं से हरा भरा हो जाता है। अहोई का अर्थ एक प्रकार से यह भी होता है “अनहोनी को होनी बनाना” जैसे साहुकार की छोटी बहू ने कर दिखाया था.
अहोई अष्टमी व्रत विधि
अहोई अष्टमी कथा (२)
गणेश जी की कथा
Recipes for AAHOI

No comments:
Post a Comment